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व्यापम घोटाले और मौत की सीबीआई जांच, मौतों की डरावनी कड़ियों में यही उपयुक्त रास्ता

घोटाला का केन्द्र व्यापम कार्यालय
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अवधेश कुमार

यह आवश्यक नहीं कि

जितने लोग गिरफ्तार किए गए उनसे पूरा गैंग जेल के अंदर आ गया है। जो अंदर आ गए वो भी बचने के लिए बाहर हत्या करवा सकते हैं। हम नहीं कहते कि हर मौत व्यापम से जुड़ीं हत्याएं ही है। लेकिन उससे जुड़ीं हत्याएं हुईं ही नहीं, यह भी कोई नहीं कह सकता है। तो इसकी समग्र जांच या छानबीन परिस्थितियों की मांग है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम घोटाले की जांच सीबीआई से कराने पर राजी होने को लेकर चहे हम जो भी प्रतिक्रिया दें, यह निर्णय उचित है। इसमें तो दो राय हो ही नहीं सकता कि व्यापक परीक्षाएं महाभ्रष्टाचार का केन्द्र बन चुकी थीं और यह लंबे समय से था। व्यावसायिक परीक्षा मंडल मध्यप्रदेश में तकनीकी, पेशेवर संस्थानों में नामांकन की परीक्षायें लेता है तथा उन पदों पर नियुक्तियां करता है, जो म.प्र. लोक सेवा आयोग से बाहर हैं। इसमें प्री मेडिकल टेस्ट, प्री इंजीनियरिंग टेस्ट और कई सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं होतीं हैं।

कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन

प्रवेश एवं भर्ती परीक्षा को लूट एवं भ्रष्टाचार का अड्डा बनाकर प्रदेश ही नहीं पूरे देश को शर्मसार कर दिया था। कॉन्ट्रैक्ट शिक्षक, ट्रैफिक पुलिस, सब इंस्पेक्टरों की भर्ती परीक्षा के अलावा मेडिकल प्रवेश परीक्षा में ऐसे लोगों को सफल घोषित किया गया जिनके पास परीक्षा में बैठने की योग्यता नहीं थी। सरकारी नौकरियों में करीब हजार से ज्यादा बहाली तथा मेडिकल में 500 से ज्यादा नामांकन संदेह के घेरे में है। जो कांग्रेस इतना हंगामा कर रही है उसके शासनकाल तक यह घोटाला जाता है। किंतु जबलपुर उच्च न्यायालय की निगरानी में एसटीएफ एवं एसआईटी जो जांच कर रही थी उससे घोटाले का पर्दाफाश हो गया था और कानूनी कार्रवाई भी रास्ते पर थी।

इसने प्रवेश एवं भर्ती परीक्षा को लूट एवं भ्रष्टाचार का अड्डा बनाकर प्रदेश ही नहीं पूरे देश को शर्मसार कर दिया था। कॉन्ट्रैक्ट शिक्षक, ट्रैफिक पुलिस, सब इंस्पेक्टरों की भर्ती परीक्षा के अलावा मेडिकल प्रवेश परीक्षा में ऐसे लोगों को सफल घोषित किया गया जिनके पास परीक्षा में बैठने की योग्यता नहीं थी। सरकारी नौकरियों में करीब हजार से ज्यादा बहाली तथा मेडिकल में 500 से ज्यादा नामांकन संदेह के घेरे में है। जो कांग्रेस इतना हंगामा कर रही है उसके शासनकाल तक यह घोटाला जाता है। किंतु जबलपुर उच्च न्यायालय की निगरानी में एसटीएफ एवं एसआईटी जो जांच कर रही थी उससे घोटाले का पर्दाफाश हो गया था और कानूनी कार्रवाई भी रास्ते पर थी। 2590 लोगों पर मामला दर्ज होना, 2099 की गिरफ्तारी और इनमें से 755 मामलों में न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल होने तथा 1194 गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद उच्च न्यायालय की निगरानी में चल रही कार्रवाई पर बहुत ज्यादा उगली उठाने की गुंजाइश नहीं है। जांच में कोताही बरती जाती तो पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा से लेकर व्यापम के नियंत्रक, सिस्टम एनेलिस्ट सहित बड़े लोगों की गिरफ्तारियां शायद ही हो पातीं। इतने अधिक मामले भी शायद ही दर्ज होते। लेकिन मुख्य प्रश्न तो मौतों को लेकर खड़ा हो गया था।

व्यापम घोटाला मध्यप्रदेश व्यावसायिक शिक्षा संस्थान में नामांकन तथा अनेक भर्तियों मेें होने वाली धांधलियों में संभवतः प्रकाश में आने वाला देश का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार साबित हो सकता है।

किंतु जिस तरह से लगातार अस्वाभाविक मौतें हो रहीं हैं उनसे भ्रष्टाचार के इस मामले ने खूनी अपराध का मोड़ ले लिया है। इसकी ठीक संख्या बताना कठिन है, कारण एनजीओ एवं विपक्ष 45 तक की बात कर रहा है। मुकदमा दर्ज होने के बाद ऐसी करीब 25 मौतें हैं जिनके बारे कें कहा जा सकता है कि इनका संबंध किसी न किसी रुप में व्यापम से था। इससे कई प्रकार के संदेह पैदा हो रहे हैं। हालांकि पत्रकार अक्षय सिंह तथा जबलपुर के मेडिकल कॉलेज के डीन अरुण शर्मा के पोस्टमार्टम में कोई ऐसा असामान्य पहलू नहीं पाया गया है, लेकिन अक्षय अगर व्यापम की कवरेज कर रहे थे तो डॉ. शर्मा ने विशेष जांच दल को 200 पृष्ठों का दस्तावेज मुहैया कराया था जिसमें फर्जी मेडिकल छात्रों की जानकारी थी। इसके ठीक एक वर्ष पहले 4 जुलाई 2014 को जबलपुर मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डीके साकल्ले की लाश उनके घर में जली हुई अवस्था में मिली थी। साकल्ले ने व्यापमं घोटाले में शामिल फर्जी छात्रो को अपने कॉलेज से बर्खास्त कर किया था। माहौल ऐसा बन गया है कि सागर पुलिस प्रशिक्षण केन्द्र में प्रशिक्षु अनामिका कुशवाहा का व्यापम घोटाल में नाम तक नहीं था, लेकिन उसकी जलाशय में कूद कर जान देने को भी इससे जोड़ दिया गया। इस तरह की मौतों से संदेह तो पैदा होता ही है कि कहीं इस घोटाले से जुड़े लोग ऐसे लोगों को रास्ते से हटाने का अपराध तो नहीं कर रहे जो उनके लिए सजा दिलवाने का कारण बन सकते हैं।

जिस तरह से लगातार अस्वाभाविक मौतें हो रहीं हैं उनसे भ्रष्टाचार के इस मामले ने खूनी अपराध का मोड़ ले लिया है। इसकी ठीक संख्या बताना कठिन है, कारण एनजीओ एवं विपक्ष 45 तक की बात कर रहा है। मुकदमा दर्ज होने के बाद ऐसी करीब 25 मौतें हैं जिनके बारे कें कहा जा सकता है कि इनका संबंध किसी न किसी रुप में व्यापम से था। इससे कई प्रकार के संदेह पैदा हो रहे हैं। हालांकि पत्रकार अक्षय सिंह तथा जबलपुर के मेडिकल कॉलेज के डीन अरुण शर्मा के पोस्टमार्टम में कोई ऐसा असामान्य पहलू नहीं पाया गया है, लेकिन अक्षय अगर व्यापम की कवरेज कर रहे थे तो डॉ. शर्मा ने विशेष जांच दल को 200 पृष्ठों का दस्तावेज मुहैया कराया था जिसमें फर्जी मेडिकल छात्रों की जानकारी थी।

देश भर में व्यावसायिक तथा नौकरी भर्ती संबंधी परीक्षाओं को भ्रष्ट करने का इतना बड़ा तंत्र विकसित हो चुका है और उसमें ऐसे तत्व शामिल हैं जो अपने तंत्र की रक्षा के लिए किसी सीमा तक जा सकते हैं। बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश, पूर्वोत्तर सब जगह मेडिकल, इंजीनियरिंग, लोकसेवा आयोग आदि में प्रश्न पत्रों के परीक्षा के पूर्व ही बाजार में बिकने, फर्जी छात्रों के परीक्षा में बैठने, गलत तरीके से पास कराए जाने आदि के अनेक मामले आते रहे हैं।

व्यापम घोटाला मध्यप्रदेश व्यावसायिक शिक्षा संस्थान में नामांकन तथा अनेक भर्तियों मेें होने वाली धांधलियों में संभवतः प्रकाश में आने वाला देश का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार साबित हो सकता है। यह तो संयोग कहिए कि 7 जुलाई, 2013 को इंदौर में पीएमटी प्रवेश परीक्षा में कुछ छात्र फर्जी नाम पर परीक्षा देते पकड़े गए और उनसे पूछताछ के दौरान ग्वालियर के जगदीश सागर का नाम सामने आया जो पैसे लेकर फर्जी तरीके से नामांकन करवाता था। जगदीश से एसटीएफ की पूछताछ में ही खुलासा हुआ कि यह एक बड़ा नेटवर्क है जिसमें मंत्री से लेकर बड़े अधिकारी और दलालों का पूरा गैंग काम कर रहा है। इनका काम करने का तरीका भी एकदम व्यवस्थित था। हर पद के लिए, हर सीट के लिए राशि तय थी। कहीं किसी वास्तविक उम्मीदवार को फर्जी उम्मीदवार के बगल में बिठाया जाता था, तो कहीं उम्मीदवार की जगह पर ही फर्जी उम्मीदवार परीक्षा देता था, कहीं उत्तर पुस्तिका ही खाली छोड़ दी जाती थी।

Shivraj

यह आवश्यक नहीं कि जितने लोग गिरफ्तार किए गए उनसे पूरा गैंग जेल के अंदर आ गया है। जो अंदर आ गए वो भी बचने के लिए बाहर हत्या करवा सकते हैं। हम नहीं कहते कि हर मौत व्यापम से जुड़ीं हत्याएं ही है। लेकिन उससे जुड़ीं हत्याएं हुईं ही नहीं, यह भी कोई नहीं कह सकता है। तो इसकी समग्र जांच या छानबीन परिस्थितियों की मांग है।

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Awadhesh Kumar
A well known Public figure,Tv Panellist, Versatile senior Journalist,writer, popular public speaker in high demand, Political Analyst as well as Social Political Activist.

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