Ask AwadheshSelf ExpressionSocial/ समाजअपनी बातविचार

यह साइट www.theaajkal.com क्यों ?

498views

अवधेश कुमार

यह साइट समाचारों और विचारों पर आधारित अन्य वेबसाइटों की तरह नहीं है। हालांकि उसका स्वरुप यहां है। यह समाजसेवी संस्था की तरह का भी नहीं है। न यह धार्मिक समूह या अन्य संगठनों की तरह उनके लक्ष्यों के लिए अभिप्रेरित करने वाला साइट है। यह किसी आंदोलन, अभियान, संघर्ष, रचना के कार्यों में लगे संगठनों, संस्थाओं के सदृश भी नहीं है। किंतु, इन सबका परावर्तन या मोटा मोटी समुच्चय इसमें आपको मिलेगा।

मेरा वेबसाइट theaajkal.com आपके समक्ष गांधी 150 पुनर्जागरण का ऐतिहासिक अवसर पर प्रस्तुत है। जैसा आपने देखा इसका नाम आजकल है। आज और कल यानी वर्तमान, अतीत और भविष्य…तीनों को एक साथ समेटते हुए। वर्तमान में जो घटित हो रहा है, जो हम कर रहे हैं, उनका अतीत से जो नाता रहा है, उनकी जो पृष्ठभूमि रही है, अतीत और पृृष्ठभूमि के साथ जो सबक और सीख जुड़ीं हैं तथा उनका वर्तमन व भविष्य के लिए जो संकेत संदेश है….सबको तारतम्यता के साथ पिरोने की चेष्टा।

कहने की आवश्यकता नहीं कि मेरे लिए जीवन की सक्रियता के एक और पहलू की यह शुरुआत है। जीवन में पहले से निश्चय है मैं सक्रियता, सोच, समझ, सृजन के साथ आपके समक्ष उपस्थित रहूं, समाज से जुड़ा रहूं तथा परस्पर प्रेरणाओं के आदान-प्रदान से समाज, देश, विश्व व सम्पूर्ण मानवता के हित में अकेले या सामूहिक प्रयासों से कुछ कर सकूं। इसे विस्तारित करें तो सम्पूर्ण सृष्टि का एक अंग होने के नाते उसका जो मूल सृजनात्मक चरित्र है उसमें कुछ योगदान कर सकें यही अपनी समस्त गतिविधियों का अभिष्ट रहा है।

तो इस साइट का अभिष्ट इससे अलग नहीं हो सकता। स्पष्ट है कि यह साइट समाचारों और विचारों पर आधारित अन्य वेबसाइटों की तरह नहीं है। हालांकि उसका स्वरुप भी यहां है। यह किसी समाजसेवी संस्था की तरह का भी नहीं है। न यह किसी धार्मिक समूह या अन्य संगठनों की तरह उनके लक्ष्यों के लिए अभिप्रेरित करने वाला साइट है। यह किसी आंदोलन, अभियान, संघर्ष, रचना के कार्यों में लगे संगठनों, संस्थाओं के सदृश भी नहीं है। किंतु, इन सबका परावर्तन या मोटा मोटी समुच्चय इसमें आपको मिलेगा। यह शत-प्रतिशत व्यावसायिक वेन्च्यूर तो हो भी नहीं सकता।

जीवन में निश्चय है मैं सक्रियता, सोच, समझ, सृजन के साथ उपस्थित रहूं, समाज से जुड़ा रहूं तथा परस्पर प्रेरणाओं के आदान-प्रदान से समाज, देश, विश्व व सम्पूर्ण मानवता के हित में अकेले या सामूहिक प्रयासों से कुछ कर सकूं। इसे विस्तारित करें तो सम्पूर्ण सृष्टि का एक अंग होने के नाते उसका जो मूल सृजनात्मक चरित्र है उसमें कुछ योगदान कर सकें यही अपनी समस्त गतिविधियों का अभिष्ट रहा है। तो इस साइट का अभिष्ट इससे अलग नहीं हो सकता।
अपने व्यक्तित्व और सक्रियता से शेष अंशों को परे रखकर केवल एक सामान्य पत्रकार होने के नाते बात करुं तो लोक कल्याण की दृृष्टि से सही और निष्पक्ष सूचना देना, लोगों को जागृत करना तथा लोक शिक्षण करना …..यही मूल तीन लक्ष्य किसी पत्रकार का हो सकता है। हां, इसमें थोड़ा स्वस्थ मनोरंजन का पहलू भी जुड़ा है। वर्तमान दौर में सूचना और विचार के संजाल की व्यापकता इतनी है कि आप उसमें उलझे रह जाते हैं। कितनी सूचना और कितना विचार आपके लिए आवश्यक है इसका निर्धारण तो इसी आधार पर होगा कि वर्तमान परिवेश में एक जागरुक नागरिक के नाते हमें क्या करना है या करना चाहिए। इसी कसौटी को ध्यान में रखकर मैं अपने जीवन की ज्यादातर गतिविधियां संचालित करने की कोशिश करता हूं।

यह साइट इसी दिशा में हमारा आपका सहयोगी बने ऐसी कोशिश करते रहने का विचार किया है। क्या कर सकूंगा, कितने दिन कर सकूंगा, कैसे कर सकूंगा कहना कठिन है। कल की तो छोड़िए, अगले पल क्या होगा कोई नहीं जानता। वर्तमान पर भी अपना पूरा वश नहीं होता। आसपास की परिस्थितियां, परिवेश, प्रकृति ……. हमारी सोच और जीवन की गतिविधियों को प्रभावित करतीं रहतीं हैं। बावजूद इसके वर्तमान में बहुत कुछ अपने हाथों है। तो फिर उसमें जितना कर सकें वही आत्मसंतोष का विषय होना चाहिए।

आपको इस साइट में ‘जीवन सूत्र’ जैसे स्तंभ मिलेंगे जिसमें मैं स्वयं अपने जीवनानुभवों, दूसरों के अनुभवों, अध्ययन, महापुरुषों के कथनों, धार्मिक-आध्यात्मिक-दार्शनिक पुस्तकों, लोक व्यवहार आदि के आधार पर आपके जीवन में उत्पन्न होने वाले प्रश्नों, समस्याओं, चुनौतियों पर इस तरह का व्यावहारिक सूत्र देने की कोशिश कर रहा हूं जिनके आधार पर आप आत्मविश्वास के साथ चुनौतियों, बाधाओं, दुष्चक्रों से निकलने के लिए रास्ता बना सकें। आप अनावश्यक अवसाद का शिकार न हों, निराश न हों। यानी आप किसी भी परिस्थति में गतिमान रहें। इसी तरह ‘जरा सोचिए’ स्तंभ में किसी भी घटना या प्रसंग पर अपको संबोधित छोटी टिप्पणियों से आप क्या चाहते हैं और आपका क्या मत है से सामने लाने की कोशिश होगी। अपनी बात में जो भी विचार मन में उभरतें हैं, आम धारा से अलग वो होंगे। मीडिया की भूमिका पर इस समय देश में गहन विचार मंथन है। ‘मीडिया टिप्पणी’ में मैं पत्रकारिता का और आपका प्रतिनिधि बनकर सामने आता रहूंगा। आपके भी विचार उनमें आएंगे, जिनसे शायद मीडिया की दुनिया के कुछ प्रश्नों को हम हल कर सकें। न कर सकेंगे तो कम से कम उस दिशा में कुछ प्रयास तो करेंगे ही। घटनाक्रमों पर विश्लेषण, त्वरित टिप्पणियां, विचार, अभिमत आदि तो हम करते ही रहे हैं। इसलिए स्वाभाविक है वो सब आपके सामने आते ही रहेंगे। सार्थक बहस, सकारात्मक वाद-विवाद और संवाद तो ऐसे लक्ष्य वाले किसी मंच का स्वाभाविक अंग होना ही चाहिए।

जिनने कुछ विशेष किया है या कुछ विशेष हो रहा है, जो मेरी जानकारी में है लेकिन मीडिया की नजरों में नहीं आता….. समाज भी उसे नजरअंदाज करता है…. उनको यहां उचित स्थान देने की कोशिश करुंगा ताकि उनसे हम सबको प्रेरणा मिले। उनके संगठनों, समूहों के बारे में अपनी धारणायें दुरुस्त कर सकें।

वस्तुतः लंबे समय से मेरे मित्रों, चाहने वालों, फैन्स, समर्थकों, पत्रकारिता, राजनीति, समाजसेवा, अन्य सार्वजनिक सक्रियता में मेरे साथ जुड़े लोगों का आग्रह था कि मेरा अपना कोई एक साइट होना चाहिए। मैं आरंभ में इससे सहमत नहीं था उसी तरह जैसे सोशल मीडिया को लेकर मैं गंभीर नहीं था। मेरा फेसबुक अकाउंट पत्रकार प्रेमप्रकाश ने पहले ही खोल दिया था लेकिन मेरी उसमें रुचि नहीं थी। एक परंपरागत मानसिकता का व्यक्ति होने के नाते मैं अपना पूरा फोकस समाचार पत्र-पत्रिका, टीवी चैनल, रेडियो, जनता के बीच सीधा काम, उनसे सीधे संपर्कों तक ही सीमित रखता था। लेकिन धीरे-धीरे फेसबुक पर आया और सक्रिय हो गया। कुछ दिनों से ट्विटर पर सक्रिय हुआ हूं और यूट्यूब को भी मैंने अपना लिया है। इन सबकी प्रतिक्रिया 99.99 प्रतिशत सकारात्मक और उत्साहवर्धक है। मैं यूट्यूब और गूगल के जरिये सीधे संवाद भी करने लगा हूं।

चूंकि यह आपके लिए है, इसलिए इसका भविष्य और वर्तमान दोनों आप पर निर्भर है। आप इससे कितना जुड़ते हैं, आपकी कितनी और कैसी प्रतिक्रियायें आतीं हैं, आपके क्या सुझाव आते हैं……इन सबका महत्व सर्वाधिक है। तो आइए, मिलकर एक कारवां आगे बढ़ाने की कोशिश करें। जितने दिन कर सकेंगे श्रेष्ठतम करने की कोशिश करें।

बहरहाल, अब यह साइट आरंभ हो चुका है। चूंकि यह आपके लिए है, इसलिए इसका भविष्य और वर्तमान दोनों आप पर निर्भर है। आप इससे कितना जुड़ते हैं, आपकी कितनी और कैसी प्रतिक्रियायें आतीं हैं, आपके क्या सुझाव आते हैं……इन सबका महत्व सर्वाधिक है। तो आइए, मिलकर एक कारवां आगे बढ़ाने की कोशिश करें। जितने दिन कर सकेंगे श्रेष्ठतम करने की कोशिश करें।

सादर

अवधेश कुमार

Leave a Response

Top Reviews

Video Widget