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बंगलादेश की ढाकेश्वरी मंदिर की घंटी बजाकर जो पाना चाहते हैं मोदी

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अवधेश कुमार

भारत की सांस्कृतिक आध्यात्मिक राजनय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विदेश नीति का प्रमुख अंग हो गया है। बंगलादेश की उनकी यात्रा भी इससे अछूती कैसे रह सकती थी। हमने मोदी की बंगलादेश यात्रा के पहले दिन बंगलादेश मुक्ति संग्राम के शहीदों के स्मारक जाकर 1971 के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। लिखा कि उन शहीदों को श्रद्धांजलि जिनने बंगलादेश की आजादी के लिए जान गंवाई। ऐसे आचरण का वहां के अवाम पर असर होता है।

किंतु, इससे ही सब कुछ नहीं हो जाता। मोदी के राजनय में विदेशी धरती पर वहां के प्रमुख मंदिर, गुरुद्वारा और बौद्ध विहारों में जाकर आराधना करना अनिवार्य रुप से शामिल होता है। इसका असर केवल उस देश के भारत वंशियों पर ही नहीं दुनिया भर के भारत वंशियों पर विद्युत सरीखा होता है। नेपाल में उनकी पूजा के बाद चंदन किए, रुद्राक्ष पहने और गेरुआ चादर ओढ़े हुए तस्वीर जब लाइव चली तो उसकी प्रतिक्रिया अत्यंत ही उत्साहवर्धक थी। कनाडा में भी वे मंदिर एवं गुरुद्वारा गए। चीन में बौद्ध मंदिर गए। मंगोलिया और दक्षिण कोरिया में बौद्ध मंदिर गए। भूटान में गए। श्रीलंका में सिंहलियों के प्रसिद्ध बौद्ध मंदिर गए तो तमिलों के मंदिर भी। दोनों जगह समान रुप से पूजा अर्चना की। यह उनकी भक्तिभाव को दर्शाता ही है, साथ ही इससे वहां के लोगों का भी जुड़ाव होता। इसका परिणाम हमें भविष्य में दिखाई पड़ेगा।

बंगलादेश एक मुस्लिम बहुल देश है। लेकिन वह एक समय भारत का भाग था। इसलिए हमारे अनेक देवस्थान विभाजन के बाद वहां चले गए। कट्टरपंथियों ने उनमें से अनेक नष्ट कर दिए हैं। कुछ बचे हैं। ढांका का प्रसिद्ध ढाकेश्वरी मंदिर उनमें से ही एक है। इसे हमारे प्रामाणिक शक्ति केन्द्र में माना जाता है। मोदी के वहां जाने का प्रतीकात्क महत्व बहुत ज्यादा है। बंगलादेश में जिस ढंग से कट्टरपंथी मुस्लिम बराबर हिन्दू सिख्खों पर हमला करते हैं और वे डरे सहमे रहते हैं उसमें मोदी का यह कदम उनके अंदर आत्मविश्वास पैदा कर सकता है।

अल्पसंख्यक हिन्दू अवश्य मौका मिलने पर अगनी समस्या रखेंगे। वे चाहते हैं कि मोदी उऩकी सुरक्षा, सम्मान, समान व्यवहार का मामला उठायेो।

इससे बंगलादेश के लोगों को यह अहसास तो होगा कि उनकी राजधानी ढाका का नाम ढाकेश्वरी देवी के नाम पर ही है। प्रधानमंत्री मोदी के वहां जाने के बाद यह चर्चा अवश्य वहां चलेगी। इसका महत्व आप अपने आप समझ सकते है। तो इसमें एकता के तत्व विद्यमान है।

आश्चर्य की बात है कि आज तक किसी प्रधानमंत्री को ढाकेश्वरी देवी के दर्शन की याद क्यों नहीं आई। मोदी के सांस्कृतिक धार्मिम स्थलों पर जाकर यह याद दिलाने का काम करते है कि हम बंटे होते हुए भी कितने एक हैं। दूसरे, इससे एक सांस्कृतिक भारत की तस्वीर भी बनती है। वहां के हिन्दुओं को यह अहसास होता है कि आप अकेले नहीं हो। आप निर्भय होकर वहां का कानून का पालन करते हुए काम करें। आपके साथ ऐसा अन्याय हुआ जो कि मान्य अंतरराष्ट्रीय नियमों में उठाया जा सकता है तो उठाया जाएगा। लेकिन आप यह ध्यान रखिए कि आप हमारे भाई हैं, भारत आपका अपना है ….यह भाव धार्मिक सांस्कृतिक आधार पर ज्यादा सशक्त हो सकता है।

 

तो मोदी को ढांकेश्वरी मंदिर जाने पूजा अर्चना करने के लिए धन्यवाद!

8 Comments

  1. Bas Ummeed karte hain Modi ji wahan k Hinduon pe hone wale atyachaar k baare me zaroor baat karenge…

    Baaki unka Mandir Darshan toh apne aap me anootha hai or ye unn sabhi Hinduon ko yaad dilaane k liye kaafi hai jo aajkal Mandir jaane me sharam mehsoos karte hain… Apne Dharam se Juda hona koi bura kaam nahi hai..wo bhi tab jab Hamara dharm dunia ko apna ghar maan ne wala hai..

  2. पहले के सभी PM ने वहा पूजा अर्चना नही की क्यूंकि उनका सेकुलरिज्म प्रभावित होता. मोदी भी तथाकथित सेकुलरिज्म का ध्यान तो रखते है लेकिन उसके लिए खुद को नही बदलते.

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Awadhesh Kumar
A well known Public figure,Tv Panellist, Versatile senior Journalist,writer, popular public speaker in high demand, Political Analyst as well as Social Political Activist.

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