देशमीडिया टिप्पणी

दिनकर जी को उद्धृत करके प्रधानमंत्री ने कुछ भी गलत नहीं किया

316views

दिनकर जी को उद्धृत करके प्रधानमंत्री ने कुछ भी गलत नहीं किया
अवधेश कुमार
प्रधानंमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर को उद्धृत करते हुए अगर यह कहा कि आप एक दो जातियों के सहारे शासन नहीं चला सकते तो इसमें गलत क्या है? दिनकर जी के समारोह में उनको उद्धृत करके बिहार को याद दिलाना कि आपके एक मनीषी ने आज से पांच दशक पूर्व यह लिख दिया था। बावजूद इसके बिहार जाति समीकरण के आधार पर राजनीति का अखाड़ा बन गया।
लेकिन कुछ कं्रांतिकारी लोगों को इसमें भी समस्या नजर आ रही है। बड़ी विचित्र बात है। आलोचकों की बात मान भी लंे कि भाजपा दिनकर जी के नाम पर राजनीति कर रही है तो इसमें समस्या क्या है? यह तो अच्छी बात है कि एक महान कवि, महान लेखक, विचारक का नाम लेकर राजनीति हो। आखिर अगर दिनकर जी का नाम लिया जाएगा तो उसका कुछ असर लोगोें के मन पर पड़ेगा। इससे राजनीति में सकारात्मक बदलाव की संभावना बन सकती है।
राजनीति का क्षरण ही इसलिए हुआ, क्योंकि हमारे देश में महापुरुषों को, महान कवियों को, रचनाकारों को, विचारकों को, चिन्तकों को तो किताबी विषय बना दिया गया और राजनीति उससे बिल्कुल अलग हो गई। उनको राजनीति मंे फिर से महत्व मिलने का अर्थ है, राजनीति में विचारों की वापसी की संभावना बनना। आखिर दिनकर से क्या प्ररेणा मिलती है? देश के लिए काम करने का। देश के लिए सर्वस्व समर्पण का। भारत की संस्कृति और सभ्यता से सीख लेने और इसमें विश्वास करने का। जो कुछ इनमें भी मानवोचित और न्यायपूर्ण नहीं है उनको नकारने या उन परंपराओं के खिलाफ विद्रोह करने का। समाज में असमानता की खाई को दूर करने का। दिनकर ने शांति और आर्थिक उन्नति दोनों को एक दूसरे का पूरक बताया।
इसलिए मेरा मानना है कि अगर दिनकर जी का नाम लिया जाता है तो उनकी रचनाओं की भी चर्चा होगी, उनके कथनों की भी चर्चा होगी और उसका कुछ असर अवश्य होगा। इसलिए मैं तो इसका स्वागत करुंगा।
जो लोग दिनकर को किसी विचारधारा की संकुचित परिधि में बांटते हैं उनकी अपनी समस्या है। वे बांटते रहे। दिनकर राजनीतिक विचारधारा से परे थे। इनके दावों के विपरीत वे मार्क्सवादी तो कतई नहीं थे। भूखों को अन्न देने, या संपन्नों के भोग विलास से रहने एवं गरीबोें के भूखों मरने का मार्मिक चित्रण एक विचारधारा का बपौती नहीं है। आर्थिक समानता तथा सच्चे स्वराज की बात किसी राजनीतिक विचार का पेटेंट नहीं है। यह भारतीय राष्ट्रवाद की सच्ची धारा है जिसे गांधी, विवेकानंद, अरविन्द, निराला सबने अपने-अपने तरीके से कहा है। दिनकर महान भारतीय सभ्यता की धारा के राष्ट्रवादी चरित्र थे जो सम्पूर्ण विश्व के कल्याण में अपना कल्याण देखता है।
यह आरोप कि दिनकर जी का नाम लेकर और उनके नाम पर कार्यक्रम करके भाजपा बिहार की जाति विशेष को अपने साथ खड़ा करने की कोशिश कर रही है राजनीतिक है। हो सकता है ऐसा हो भी। पर प्रधानमंत्री ने भाषण तो इसके विपरीत दिया। उन्होेंने दिनकर जी को तो जाति से उपर उठकर राज और नीति वाले पत्र को उद्धृत किया और जो कुछ कहा उसका अर्थ यही था कि जाति की सीमाओं में या कुछ जातियों के हित के नाम राजनीति करना बिहार के पिछड़ेपन का कारण है।
लेकिन जिन लोगों को आलोचना करनी है वे तो करेंगे ही। कुछ लोगांें को तो आपत्ति इस पर ही है कि मोदी और भाजपा ने दिनकर का नाम कैसे ले लिया। आज तक राजनीति में खासकर 1974 के आंदोलन के बाद दिनकर जी का किसी राजनीतिक पार्टी ने नाम तो लिया नहीं। आज कोई पार्टी ले रही है तो आपको आपत्ति है। आपकी आपत्ति से तो सब कुछ नहीं चल सकता है। आपको नाम लेने से किसी ने रोका है? आप भी लीजिए। दिनकर किसी एक पार्टी की, किसी एक संगठन की, किसी एक समूह की थाती हो भी नहीं सकते।

Leave a Response

Awadhesh Kumar
A well known Public figure,Tv Panellist, Versatile senior Journalist,writer, popular public speaker in high demand, Political Analyst as well as Social Political Activist.

Top Reviews

Video Widget